आखिर क्यों मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को लिया वापस? ये रही वजह

आखिर क्यों मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को लिया वापस
आखिर क्यों मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को लिया वापस

आखिर क्यों मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को लिया वापस? ये रही वजह

माना जा रहा है कि आने वाले समय में देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के चलते सरकार बैकफुट पर आ गई है, पंजाब, उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड जैसे राज्यों के किसान मोदी सरकार से नाराज दिख रही है, ये तीनों ही राज्यों में किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है और किसान आंदोलनों में इन राज्यों के किसान शामिल थे, उधर अगर राजनीतिक दृष्टि से देखा जाय तो पंजाब में बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल पंजाब में किसानों के मुद्दे पर ही बीजेपी से अलग हो गई थी और नरेंद्र मोदी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. साथ ही इस विवादित कानून ने पंजाब की राजनीति को गर्मा दिया था. अगर इस कानून के विरोध की बात करें तो इन कानूनों का सबसे अधिक विरोध पंजाब में ही हुआ. चुनावी माहौल में पंजाब में लोग सार्वजनिक तौर पर बीजेपी के नेताओं का विरोध कर रहे थे. बीजेपी नेताओं को पंजाब में घूमने नहीं दिया जा रहा था, इसका नतीजा ये हो रहा था कि बीजेपी से कोई भी जुड़ने को तैयार नहीं हो रहा था हालांकि बीजेपी ने पंजाब के लोगों की नाराजगी को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने का फैसला किया था. उससे भी बात नहीं बनी. वहीं कृषि कानूनों का सबसे अधिक विरोध करने वालों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान भी शामिल थे. उत्तरप्रदेश को राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है और आने वाले समय मे विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव भी होने हैं…

 

तब तक घर नहीं जाएंगे किसान

 

उधर दिल्ली -यूपी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले एक साल से भी अधिक समय से आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता जट्टा सिंह बाजवा ने #TodayXpress से बातचीत करते हुए कहा कि जब तक MSP पर गारंटी कानून नहीं बन जाता और सरकार आने वाले संसद सत्र में संसद के पटल से बिल को खारिज नहीं कर देती तब तक किसान घर नहीं जाएंगे… साथ ही @TodayXpress जब सयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता से सवाल किया कि किसान बिलों को वापस लेने पर क्या बीजेपी को फायदा होगा तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि BJP को एक फायदा ये होगा कि उनके नेता अब गॉवों और शहरों में जाकर चुनाव प्रचार कर सकेंगे जो पहले नहीं कर पा रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. इन कानूनों का देश के किसान विरोध कर रहे हैं…

 

किसानों के आंदोलन के बाद मोदी सरकार के खिलाफ थी नाराजगी

 

जिस तरह से किसान देशभर में मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद थे उससे मोदी सरकार के।खिलाफ देश भर में गुस्सा पैदा हो रहा था, इन कानूनों के विरोध में देश भर में रैलियां निकाली गईं और किसान महापंचायतों का आयोजन किया गया. इस किसान आंदोलन का असर देश भर में देखा गया वहीं खास करउत्तरप्रदेश , हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के साथ साथ उधर पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु तक देखा गया.

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मोदी सरकार के की छवि बिगाड़ने की हुई कोशिश

 

किसान आंदोलन के समर्थन में दुनियामो मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाजी की गई जिसे दुनिया भर की मीडिया ने कवरेज भी दी. इसके अलावा कृषि कानूनों के विरोध में ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन आयोजित किए गए थे. जिससे मोदी सरकार की जनविरोधी छविको दर्शाया गया.

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