उत्तर प्रदेश में टूरिज्म को बढ़ावा देने के मंसूबों पर फिरा पानी

यूपी टूरिज्म की टैगलाइन है कि यूपी नहीं देखा तो फिर क्या देखा

उत्तर प्रदेश में टूरिज्म को बढ़ावा देने के मंसूबों पर फिरा पानी

REPOR – SEETA PAL, MAHOBA

महोबा: यूपी टूरिज्म की टैगलाइन है कि यूपी नहीं देखा तो फिर क्या देखा, जी हां पर्यटक यूपी के महोबा में स्थित इतिहास के पन्नों में दर्ज राम कुंड तीर्थ तो पहुंचना चाहते हैं लेकिन नगर पालिका प्रशासन इस तीर्थ के मार्ग पर रोड़ा बना हुआ है… दरअसल सीएम योगी आदित्यनाथ के यूपी टूरिज्म को बढ़ावा देने के मंसूबों पर महोबा नगर पालिका परिषद की चेयरमैन पानी फेरती नजर आ रही हैं… भारतीय पुरातत्व विभाग के दस्तावेजों में दर्ज अति प्राचीन तीर्थ स्थल के नाम से मशहूर ‘रामकुंड’ मार्ग का नाम बदलकर अपने पूर्वज श्री मकुंद लाल तिवारी मार्ग कर देने से मंदिर के पुजारियों,नागरिकों और समाजसेवियों ने श्रद्धालुओं की सहूलियत को लेकर “रामकुंड” मार्ग का नाम वापिस करने की मांग की है… फिलहाल नगर पालिका परिषद के प्रभारी एसडीएम ने पालिका बोर्ड की बैठक में नए प्रस्ताव के बाद नाम वापिस की प्रक्रिया पूरी किए जाने की बात कही है…

आज हम आपको बुंदेलखंड के ऐतिहासिक रामकुंड मार्ग लेकर चलते हैं … जहां पर नगर पालिका प्रशासन की चेयरमैन की मनमानी आप को साफ तौर पर देखने को मिलेगी … दरअसल करीब 9000 साल पहले त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान महोबा में आकर लंका पर विजय पाने के लिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ का आयोजन किया था …यज्ञ के आयोजन को लेकर भगवान श्रीराम ने भाई लक्ष्मण के साथ विशाल कुंड का निर्माण किया था … तभी से इस ऐतिहासिक स्थल का नाम रामकुंड के नाम से पौराणिक कथा में प्रचलित है… अति प्राचीन रामकुंड की दुर्दशा को देख नगर पालिका ने करीब 36 लाख रुपए का बजट पास कर पार्क का निर्माण कराया था … राम कुंड के पास पार्क के निर्माण के बाद भी आज भी वहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है … और नवनिर्मित पार्क सफाई व्यवस्था को तरस रहा है… हालात इतने खराब हैं कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रोशनी तक व्यवस्था नहीं है… महोबा के ऐतिहासिक राम कुंड में साधु संतों की पांच समाधिया आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है, तो वहीं बरसों पुराना बरगद का पेड़ आज भगवान श्री राम की याद दिलाता है मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह बरगद का पेड़ करीब 9000 साल पुराना है जो आज भी कुंड के पास स्थित है … इस कुंड की विशेषता है कि किसी प्रकार के चर्म रोग से ग्रसित प्राणी रविवार और बुधवार को स्नान करने के बाद तमाम रोगों से मुक्ति पाता है…

रामकुंड मैं भगवान शिव की पूजा अर्चना को लेकर प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार कर 12 ज्योतिष शिवलिंग का भव्य निर्माण हाल ही के कुछ वर्षों में समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार शिव किशोर पांडे के द्वारा कराया गया है … भगवान शिव पर आस्था रखने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में भगवान की पूजा अर्चना के लिए मंदिर में पहुंचते हैं … लेकिन रामकुंड की दुर्दशा और आवागमन वाले मार्ग पर रामकुंड का सिलापटल या फिर कोई डिस्प्ले बोर्ड ना होने के चलते दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है… समाजसेवी का कहना है कि नगर पालिका प्रशासन अगर पार्क बनवाने पर लाखों रुपए खर्च कर सकता है तो उसकी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से करना अनिवार्य होता है … साथ ही इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पर पहुंचने के लिए रोशनी की व्यवस्था बेहद अनिवार्य है …

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