खतरें में कांग्रेस का अस्तित्व! राहुल गांधी से उठा कांग्रेस नेताओं का भरोसा!

खतरें में कांग्रेस का अस्तित्व! राहुल गांधी से उठा कांग्रेस नेताओं का भरोसा!
खतरें में कांग्रेस का अस्तित्व! राहुल गांधी से उठा कांग्रेस नेताओं का भरोसा!

खतरें में कांग्रेस का अस्तित्व! राहुल गांधी से उठा कांग्रेस नेताओं का भरोसा!


Report By- Vanshika Singh


नई दिल्ली- क्या कांग्रेस का अस्तित्व खतरें में है?… क्या कांग्रेस बीते कल की बात बनने वाली है… क्या अब राहुल गांधी पर कांग्रेस के नेताओं का भरोसा नहीं रहा… क्या अब कांग्रेस में बड़े बदलाव का वक्त आ गया है… क्या कांग्रेस की कमान अब प्रियंका गाधी वाड्रा को सौंप देनी चाहिए… क्या पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू बने कांग्रेस की बर्बादी का कारण… कांग्रेस का आगे अब रास्ता क्या है…आज ये तमाम सवाल लोगों के जहन में उठ रहे होंगे कि क्या अब कांग्रेस बीते कल की बात बन जाएगी…

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद जहां BJP पार्टी और आम आदमी पार्टी अपनी सफलता को लेकर जश्न मना रही हैं, वहीं कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी फिलहाल मंथन में जुटी हैं… खासकर कांग्रेस में तो लगातार खराब प्रदर्शन को लेकर शीर्ष नेतृत्व पर ही सवाल उठने लगे हैं… अब पांचों राज्यों के नतीजे आने के बाद आत्ममंथन के लिए जो बैठक हुई, उसमें कुछ बड़े नेताओं ने सीधे तौर पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया… इन नेताओं का कहना था कि उन्हें राहुल के नेतृत्व पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है… आखिर राहुल गांधी पर भरोसा क्यों नहीं रहा… इसके लिए चलिए शुरुआत पंजाब से करते हैं… पंजाब में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा…चाहे वो सीएम रहे चरणजीत सिंह चन्नी हो या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धु तक अपनी सीट नहीं बचा पाए… और इसका कारण रहा कंग्रेस की आपसी कलह जिसे आलाकमान ने या तो अनदेखा कर दिया या वो भांप नहीं पाए… क्योंकि पंजाब में जो लड़ाई पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धु के बीच थी वो चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाते ही चरणजीत सिंह चन्नी बनाम सिद्धु हो गई… और जिसका खमियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा… चलिए अब बात उत्तराखंड़ की करते हैं… जहां इस बार कांग्रेस को पूरा भरोसा था कि इस बार उत्तराखंड में उसकी ही सरकार बनेगी… लेकिन वहां भी कांग्रेस की अंतर्कलह ही कांग्रेस को ले डूबी… मणिपुर में कोमोबेश यही स्थिति रही… वहीं उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने खुब मेहनत की 142 विधानसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारा लड़की हूं लड़ सकती हूं जैसा नारा दिया… लेकिन महज दो सीट पर कांग्रेस सिमट कर रह गई… जाहिर है अब कांग्रेस को मंथन करना होगा और नए बदलाव के साथ आगे बढ़ना होगी नहीं तो कांग्रेस को बीत कल की बात बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा…

और अब बात करते हैं कि जो कांग्रेस की बैठक की दरअशलइस बैठक में कांग्रेस के कई पदाधिकारी और बड़े नेता शामिल रहे… राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और अखिलेश प्रसाद सिंह भी बैठक में शामिल रहे…वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और कुछ अन्य नेता इस मीटिंग से वर्चुअल तौर पर जुड़े थे…. बैठक के दौरान इन नेताओं ने कांग्रेस पर अस्तित्व के संकट का खतरा भी बताया और साफ किया कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो आगे पार्टी को और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है… इन नेताओं ने पंजाब में कांग्रेस के विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी के उभार पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के बदलाव पार्टी को उन सभी राज्यों में हाशिए पर धकेल देंगे, जहां क्षेत्रीय दल आगे आ रहे हैं… वहीं कांग्रेस के जी-23 ग्रुप से जुड़े हुए एक और वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनको तो पंजाब समेत अन्य राज्यों के परिणामों का पहले से ही अंदाजा था.. उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी में चापलूस और नेतृत्व की आंखों में धूल झोंकने वाले लोगों को राइट टाइम नहीं किया जाता है तब तक पार्टी ऐसे ही बिखराव की ओर बढ़ती रहेगी…जी-23 ग्रुप से जुड़े एक वरिष्ठ नेता की माने तो पंजाब में कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर जिस तरीके से टिकट वितरण किया गया और पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का पूर्व मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच तू-तू मैं-मैं हुई, उससे पार्टी के कार्यकर्ताओं का न सिर्फ मनोबल टूटा बल्कि उनको दूसरे बेहतर विकल्प भी मिले… वो कहते हैं कि चुनाव के दौरान पंजाब से पार्टी के बड़े नेताओं का अलग हो जाना भी पार्टी नेतृत्व की कमजोरी रही…

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