प्रतिभा का परचम : 21 की उम्र में 18 देशों से हासिल किये 60 अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च ऑफर…

नई दिल्ली- रात कितनी ही भले हो स्याह, आखिर में उसे। मात खानी ही पड़ेगी, रौशनी के हाथ से। कोविड महामारी से उबरते भारत में आर्थिक चुनौती झेल रहे परिवारों के कई छात्र सफलता का शिखर प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। टीआईईटी, पटियाला में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र अभिषेक अग्रहरी भी उनमें से एक हैं जो अपनी सफलता की कहानी को तराशने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों को मात देते हुए पिछले एक साल में अपनी उम्र से भी अधिक अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत 18 देशों के 60 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से शोध से जुड़े कई रिसर्च ऑफर हासिल किये हैं। इंजीनियरिंग के अलावा उन्हें कई देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों से गणित के क्षेत्र में भी शोध का प्रस्ताव मिला है।

अभिषेक ने कहा , “इसके लिए विस्तृत शोध अध्ययन, लगनशीलता और वित्तीय सहायता के साथ साथ कठोर परिश्रम करना पड़ता है। विडंबना यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर मेरा परिवार मेरे शोध कार्य के लिए आर्थिक समर्थन करने में सक्षम नहीं है। जीवन हमारे लिए कभी आसान नहीं रहा। पिछले साल मेरे पिता की नौकरी छूटने के बाद सारी परेशानियाँ शुरू हो गयीं। प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहा परिवार गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा है”।

21 वर्षीय दिल्ली के बहु-विषयक छात्र ने कहा, “अभी मैं शुद्ध और अनुप्रयुक्त गणित से लेकर संघनित पदार्थ भौतिकी, सामग्री विज्ञान, रसायन विज्ञान और रासायनिक जीव विज्ञान तक विभिन्न अनुसंधान विषयों पर आठ संस्थानों के साथ रिमोटली कोलैबोरेशन कर रहा हूँ। मेरे पास जनवरी से अगले साल के लिए शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों से कई प्रस्ताव निर्धारित हैं। मुझे अपने शोध संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रायोजकों की आवश्यकता है ।”

वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे अभिषेक ने कहा कि शोध कार्य के लिए जनवरी, 2022 से प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों का दौरा करने और अपने सपने – “देश के लिए नोबेल पुरस्कार (विज्ञान में) और फील्ड मेडल जीतने” को साकार करने के लिए उन्हें प्रायोजकों की तलाश है। छात्रों के लिए विज्ञान और गणित दोनों में शोध ऑफर प्राप्त करना दुर्लभ है, लेकिन अभिषेक इस संबंध में अर्हता प्राप्त करने वालों में से एक हैं।

अग्रहरी ने कहा, विज्ञान और गणित के पूरे इतिहास में किसी को भी नोबेल और फील्डस मेडल दोनों नहीं मिला है। केवल 4 वैज्ञानिक – जे. बारडीन, एम. क्यूरी, एल. पॉलिंग और एफ सेंगर को 2 नोबेल पुरस्कार मिले हैं। शोधकर्ताओं को टोपोलॉजी के क्षेत्र में फील्ड मेडल से भी नवाजा जा चुका है और ब्लैकहोल फिजिक्स-2020 में नोबेल रॉजर पेनरोज़ को और संयुक्त रूप से रेइनहार्ड जेनज़ेल और एंड्रिया गेज़ को दिया गया। इसलिए, मेरे शोध के क्षेत्र में पेनरोज़ फोर्मलिजम का अत्यधिक उपयोग है ।

अभिषेक हर दिन कुछ नया तलाशने की निरंतर इच्छा में विश्वास करते है। ’‘शोध ने मुझे शुरू से ही आकर्षित किया है क्योंकि मुख्यधारा में जो किया गया है उसका अनुसरण करना मुझे पसंद नहीं है। मैं लगातार कुछ नया तलाशना चाहता हूं।”

उन्होंने कहा कि उन्हें अपने शोध के लिए अन्य स्रोतों से अध्ययन करना होगा क्योंकि जिन विषयों पर वह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं उन्हें स्नातक स्तर पर पढ़ाया नहीं जाता है और अधिकतर शोध पोस्ट-डॉक्टरल या पीएचडी स्तर के दौरान किए जाते है।

“वर्तमान में मैं मियामी विश्वविद्यालय, रटगर्स विश्वविद्यालय (दोनों संयुक्त राज्य अमेरिका में) और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में शुद्ध गणित के क्षेत्र में कुछ अन्य विधाओं के साथ इम्पीरियल कॉलेज, लंदन/ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (रिमोटली) में ब्लैक होल के निर्माण पर काम कर रहा हूं।”

उन्होंने कहा, “चूंकि मेरा सारा काम अनुसंधान उन्मुख है और एक बहु-विषयक होने के नाते मैं शुद्ध गणित, यांत्रिक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान, भौतिकी और पेनरोज़ औपचारिकता से लेकर विभिन्न पहलुओं को सीखता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे अनुसंधान का क्षेत्र अब से कुछ साल बाद फील्ड्स और नोबेल के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा ” ।

आर्थिक समस्याओं से उबर कर अपने सपनों को पंख लगाने के लिए उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मदद की गुहार लगाई है। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री स्वयं आईआईटी खड़गपुर से पढ़े हुए हैं, अतएव वह उनकी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझेंगे।

परिस्थितियों के मद्देनज़र उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह को भी पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। इसके अलावा उन्होंने बर्दवान आसनसोल से भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया, पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर को भी पत्र लिखा है। लेकिन अब तक उन्हें कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया है।

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