भगवान श्री राम से सीखे लीडरशिप के गुण, जीवन में नहीं होंगे असफल…

भगवान श्री राम से सीखे लीडरशिप
भगवान श्री राम से सीखे लीडरशिप

भगवान श्री राम से सीखे लीडरशिप के गुण, जीवन में नहीं होंगे असफल

Today Thought: आपने दुनिया के अनेक Leaders की कहानियां और उनकी Leadership के किस्से सुने होंगे… राजनीति हो या खेल, सामाजिक मंच हो या पारिवारिक, हर जगह किसी को दिशा देने के लिए एक अच्छे Leader की जरूरत होती है… लेकिन इससे अगर आपको कुछ सिखना है तो जाति-धर्म और हिंदू-मुस्लिम से उपर उठकर सिखना होगा… हर किसी की इच्छा होती है कि वो अपने जीवन में सफलता के आयाम छुए, असाधरण सफलता हासिल करें… लेकिन हर व्यक्ति उसमें सफल नहीं हो पाता, ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते हैं या अपने जीवन में सफल होते हैं…. कभी सोचा है आपने कि आखिर ऐसा क्यों होता है… कभी वक्त मिले तो सोचिएगा जरुर,,,, दरअसल सफलता पाने के लिए या एक सफल शासक, बॉस, टीम लीडर, नेतृत्वकर्ता बनने के लिए व्यक्ति के भीतर कई गुण होने चाहिए… प्रभु श्री राम से हम ऐसे कई गुण सीख सकते हैं जो आपको सफल बनाने में आपका साथ देंगे…ये तो आप सभी को पता होगा कि प्रभु श्री राम परमपिता, भगवान विष्णु के अवतार थे… उनके पास असीम शक्तियां थी, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी इन शक्तियों का दुरूपयोग नहीं किया…आपने दुनिया के अनेक Leaders की कहानियां और उनकी Leadership के किस्से सुने होंगे… राजनीति हो या खेल, सामाजिक मंच हो या पारिवारिक, हर जगह किसी को दिशा देने के लिए एक अच्छे Leader की जरूरत होती है…

राम कैसे बने मर्यादा पुरुषोत्तम राम…

आप जरा सोचकर देखिए कि आप एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसके कई पिढियां सदियों से भारत पर राज करती रही हो… और आपका राज्यभिषेक होने वाला हो लेकिन आपको अचानक से ये कह दिया जाए आपको 14 साल के लिए ये सब राजपाठ छोड़कर जंगलों में रहना होगा…तो उस वक्त आपको कैसा लगेगा, मैं ये कहता हूं कि आज के वक्त में सौ फीसदी लोग उनमें चाहे मैं ही क्यों ना हूं… नहीं जाएंगे सौ सवाल उठाएंगे, यहां तक कि 99 फीसदी तो कोर्ट चले जाएंगे… और कहेंगे कि मैं देखता हूं कैसे आप मेरे रहते किसी और को राजा बनाते हैं… मैं इस राज्य की इंट से इंट बजा दूंगा,,, राजपाठ के लिए कुछ तो अपने पिता की हत्या तक करने से नहीं चुकेंगे… कुछ तो ऐसे होंगे जो उसी वक्त अपने पिता की हत्या की सुपारी दें देंगे…

 

लेकिन जब भगवान श्री राम को वनवास के लिए कहा गया तो मुस्कुरातें हुए खुशी-खुशी 14 साल तक जंगल में रहने के लिए चल दिए… और उन्होंने लोगों के बीच रहकर, उनके कष्टों को समझा और एक-एक कर उनका समाधान किया… वो चाहते तो अपने किसी साथी, पड़ोसी राज्य, अपने ससुराल से मदद मांग सकते थे कि भाई मेरे लिए रहने के लिए कुछ व्यवस्था करा दो तो उनके लिए एक से एक व्यवस्था हो जाती लेकिन उन्होंने किसी की मदद नहीं ली… राम को अयोध्या से जाते हुए सरयू नदी पार करनी थी, क्या उस समय के चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के पास एक नाव नहीं रही होगी जो उन्हें नदी पार करवा दे… लेकिन नहीं राम ने एक साधारण से गरीब नाविक ‘केवट’ का सहारा लिया जो वंचित था, शोषित था… अब सवाल ये उठता है कि इससे हमे सीख क्या मिलती है… दरअसल राजा होना ये नहीं होता कि वो बड़े-बड़े जहाजों और ऐश आराम के साथ रहकर हुकूमत करे… राजा या Leader वो होता है जो अपनी प्रजा या Team के साथ रहकर उनके बीच जाकर समस्या का हल निकाले और उनका भला करे…

 

राम को विश्व के सबसे शक्तिशाली राजा रावण को हराना था.. वे चाहते तो राजाओं की सहायता ले सकते थे… रामायण के अनुसार कौशल प्रदेश उनका ननिहाल था जो पंचवटी के पास पड़ता है… वे चाहते तो उनकी सेना लेकर लंका की ओर कूच कर सकते थे… लेकिन नहीं, उन्होने सहायता ली, शोषित, वंचित और पिछड़े समाज में गिने जाने वाले लोगों की, जो रामायण के अनुसार बंदर, भालू आदि थे… राम ने अपने सबसे पिछड़े क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाया जो उनको एक अच्छा Leader बनाता है… इसी एक सवाल ये भी है कि राम ने बाली और सुग्रीव में से सुग्रीव को ही क्यों चुना… जबकि सुग्रीव से बाली कहीं ज्यादा ताकतवर था…कहा जाता है कि बाली इतना शक्तिशाली था कि उसने रावण को कई बार युद्ध में हराया था… लेकिन राम ने फिर भी सुग्रीव को चुना क्योंकि वो अन्याय का सताया हुआ और अपने ही देश से बाहर निकाला हुआ था… ये राम की अद्भुत नेतृत्व क्षमता थी कि उन्होंने सुग्रीव जैसे एक आत्मविश्वासहीन शख्स को शक्तिशाली बाली के सामने खड़ा कर दिया… ये राम का मोटिवेशन Power ही था कि सुग्रीव अपने से कई गुना ताकतवर बाली से लड़ने के लिए तैयार हो गया था…

 

दरअसल एक Leader के भीतर ये गुण भी बेहद जरुरी है कि वो अपने साथ काम करने वाले लोगों के अंदर आत्मविश्वास भर सके… तो अब आपको ये तय करना है हमे कैसा लीडर बनना है…

 


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  • 3 COMMENTS

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