61 वर्ष का हुआ एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील पर बना गांधी सागर बांध

61 वर्ष का हुआ एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील पर बना गांधी सागर बांध
61 वर्ष का हुआ एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील पर बना गांधी सागर बांध

61 वर्ष का हुआ एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील पर बना गांधी सागर बांध

रिपोर्ट- अशोक राठौर, मंदसौर, मध्य प्रदेश


मंदसौर: एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील पर बना गांधी सागर बांध 61 वर्ष का हो गया है… दरअसल गांधी सागर बांध का भूमि पूजन और लोकार्पण दोनों ही तत्कालिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था… पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस बांध का लोकापर्ण 19 नंबर 1960 को किया था… इसकी खास वजह यह थी कि उनकी पुत्री इंदिरा गांधी का जन्मदिन 19 नवंबर को हुआ था, मंदसौर जिले के भानपुर तहसील के गांधी सागर बांध की आधारशिला 7 मार्च 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी 1957 में बिजली घर का कार्य चालू हो गया था…

 

19 नवंबर 1960 में गांधी सागर बांध का लोकार्पण होकर बिजली उत्पादन कर इसका वितरण शुरू कर दिया गया था, गांधी सागर बांध के निर्माण के समय 204 गांव पूर्ण रूप से डूब चुके थे वहीं 150 गांव आंशिक रूप से डूबे थे जिनका मुहावजा दे दिया गया था, गांधी सागर बांध और पावर स्टेशन में 18 करोड़ 40 लाख का खर्च आया था… चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध की क्षमता 1313 फिट है इसने 10 बड़े और 9 छोटे गेट कुल मिलाकर 19 गेट है गेट है पावर स्टेशन में पांच विद्युत उत्पादन करने वाली टरबाइन है…

 

19 गेटों से एक साथ 5.50 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा सकता है, गांधी सागर बांध 68 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है सिर्फ 18 करोड़ 40 लाख की लागत आने पर तत्कालीन चीफ इंजीनियर चाहर को पद्मश्री से नवाजा गया था, सितंबर 2019 को अधिकारियों की लापरवाही से गांधी सागर बांध पर खतरा मंडराया था क्योंकि गांधी सागर बांध के सभी कैचमेंट एरिया में भारी वर्षा के चलते हुए फ्लो आने पर भी गांधी सागर बांध के गेट समय पर नहीं खोले थे उसी लापरवाही की वजह से 115 मेगा वाट बिजली उत्पादन करने वाली क्षमता रखने वाले टरबाइन से मात्र वर्तमान में लगभग 60 मेगा वाट बिजली का उत्पादन हो रहा है…

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