जेएनयू छात्र और नेताओं का कर रहीं दिल्ली पुलिस जमकर विरोध!

जेएनयू छात्र और नेताओं का कर रहीं दिल्ली पुलिस जमकर विरोध!
जेएनयू छात्र और नेताओं का कर रहीं दिल्ली पुलिस जमकर विरोध!

जेएनयू छात्र और नेताओं का कर रहीं दिल्ली पुलिस जमकर विरोध!


Report By- Khushi Pal


नई दिल्ली- जेएनयू के छात्र और  की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस जमकर विरोध कर रही है… वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन दंगों की साजिश का मकसद केंद्र सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना था… वहीं आपको बता दें खालिद समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है… वहीं इस विषय पर पिछले 5 महीने मे अधिक समय से वाद- विवाद लगातार जारी है… 2020 में उत्तर पूर्व दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी… जबकि 700 से ज्यादा लोग इन दगों में घायल हुए थे…

2019 और 2020 के दंगों के बीच आपसी ताल्लुक

सुत्रो के अनुसार मिली जानकारी के मुताबिक 2019 और 2020 के दंगों के बीच आपसी ताल्लुleadक थे… इस साजिश में 23 विरोध स्थल बनाए गए थे। जिससे तमाम सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सके…. और कुछ जगह पर तख्तियां और बैनर भी लगाए गए थे… जिससे ये साफ होता है की ये पूरी साजिश सही ढ़ंग से पूरी प्लानिंग करके बनाई गई थी। चार्जशीट के खुलासे के अनुसार दिसंबर 2019 के दंगों और फरवरी 2020 के दंगों के बीच आपसी ताल्लुक थे। जिसमें करीब 53 लोग मारे गए थे। आपको बता दें कि दिसंबर 2019 में पहले चरण के दंगो में 101 पुलिसकर्मी और 41 आम जनता के लोग मारे गए थे। वहीं दूसरे चरण में 132 पुलिसकर्मी के अलावा 76 अन्य घायल हुए थे। एसपी के दिए गए बयान के अनुसार 61 दावों को निपटारा किया जा चुका है। आशंका है कि अभी और लोगो का निपटारा किया जाएगा।

जांच से पता चली कुछ बाते

मामले की जांच से पता चला है कि दंगे के दौरान आग्नेयास्त्रों, पेट्रोल बम, हमले में तेजाब, लाठी, लोहे के रॉड और गुलेल का इस्तेमाल किया गया। प्रसाद ने आगे कहा कि खालिद ने अपने वकील के माध्यम से अदालत का ध्यान भटकाने के लिए अपनी जमानत अर्जी पर बहस करते हुए अप्रासंगिक सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं (उमर) चाहते हैं कि उनके आवेदन पर एक वेब श्रृंखला के संदर्भ में निर्णय लिया जाए और वर्तमान मामले को ‘द फैमिली मैन’ या ‘द ट्रायल ऑफ द शिकागो 7’ से जोड़ा जाए।

न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष याचिका

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष जमानत याचिका का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अमित प्रसाद ने जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के उन दावों का विरोध किया, जिसमें जांच एजेंसी को सांप्रदायिक और दंगों की साजिश के मामले में आरोप पत्र को एक कल्पना बताया गया था। दंगे का मकसद सरकार नागरिकता (संशोधन) अधिनियम सीएए के मामले में लोकतंत्र की नींव को अस्थिर करना था। इसके पीछे यह भी सोच थी कि केंद्र सरकार पर सीएए को वापस लेने के लिए कैसे दबाव बनाया जाए।

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