नवरात्रि पर ऐसे करें कलश की स्थापना, मिलगा पूजा का पूरा फल! जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त…

नवरात्रि पर ऐसे करें कलश की स्थापना, मिलगा पूजा का पूरा फल! जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त…
नवरात्रि पर ऐसे करें कलश की स्थापना, मिलगा पूजा का पूरा फल! जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त…

नवरात्रि पर ऐसे करें कलश की स्थापना, मिलगा पूजा का पूरा फल! जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त…


Report By- Vanshika Singh


Astrology/ ज्योतिष- नवरात्रि पर कैसे करें कलश यानी घटस्थापना, क्या है कलश स्थापना का महत्व. आखिर कैसे करें कलश की स्थापना ताकि मिल सके पूजा का सम्पूर्ण फल. कलश स्थापना करते समय किन बातों और नियमों का करें पाल. दरअसल नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा को शक्ति रूप में पूजा जाता है.  इन नौ दिनों में जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और सही विधी के साथ मां दुर्गा की आराधना करता है. उसे जीवन में किसी चीज का डर नहीं रहता. साथ ही आपको बता दें कि नवरात्र के पहले दिन होने वाली कलश स्थापना का भी खास महत्व होता है. लेकिन  पूजा का सम्पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कलश स्थापना करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है. तो चलिए आपको बताते हैं घट स्थापना की सही विधि, और सामग्री के बारे में.

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले आप मिट्टी के एक बर्तन में 7 तरह के अनाज बोएं. इसके बाद इस मिट्टी के बर्तन के ऊपर ही मिट्टी के घट यानी कलश की स्थापना करें. घट स्थापना के लिए कलश का मुख उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए. कलश को पूरा पानी से भरकर रखें. साथ ही इस जल में थोड़ा गंगाजल भी मिला दें. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें. इसके बाद मंदिर या फिर जहां पर कलश स्थापना और मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करनी है उस जगह को साफ कर लें.

इसके बाद पवित्र मिट्टी में जौ या फिर सात तरह के अनाज को मिला लें. अब कलश लें और उसमें स्वास्तिक का चिन्ह बना दें, उसके मुंह पर कलावा बांध दें. अब इसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर पानी दें और मिट्टी के ऊपर स्थापित करें. इसके बाद आम के पांच पत्तों को रखकर मिट्टी का ढक्कन रख दें. और उसमें गेहूं चावल आदि भर दें. इसके बाद लाल रंग के कपड़े में नारियल को लपेटकर कलावा से बांध दें और कलश के ऊपर रख दें. इसके बाद भगवान गणेश, मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं, नदियों आदि का आवाहन करें. इसके बाद फूल, माला, अक्षत, रोली और फिर पान में सुपारी, लौंग, इलायची, बाताशा रखकर चढ़ा दें. इसके बाद भोग लगाएं और जल अर्पित कर दें. फिर धूप-दीपक जलाकर कलश की आरती करें. इसके साथ ही एक घी का दीपक लगातार 9 दिनों तक जलने दें.

इसके बाद मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा शुरु करें.और इसी तरह पूरे नौ दिनों तक कलश की पूजा जरूर करें. ध्यान रखें कि आरती के दौरान घंटी जरूर बजाएं. फिर आरती के अंत में शंख बजाएं और ’दुर्गा माता तेरी सदा जय हो’ का जयकारा जरुर लगाएं. इसके बाद परिवार के सभी लोग चौकी के सामने हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर मां अम्बे को नमन करें. उसके बाद पूजा में रखे प्रसाद को घर के सभी सदस्यों में बांट दें. कलश स्थापना को लेकर मान्यता है कि इस कलश में सभी तीर्थ और देवी-देवताओं का वास होता है. जो मां देवी की आराधना करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करता है और शांति से पूजा-पाठ संपन्न होती है. घटस्थापना करने के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होती है.

कलश का शुभ मुहूर्त

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त- 2 अप्रैल सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक

घटस्थापना  की अवधि – करीब 2 घंटे 09 मिनट

अभिजीत मुहूर्त – 2 अप्रैल दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक

इस बार चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से आरंभ होकर 11 अप्रैल तक है। इस बार 8 नहीं बल्कि पूरे 9 दिनों की नवरात्रि पड़ रही है।

वहीं नवरात्र पर पूजा सामग्री की बात करें तो. मां दुर्गा की नई तस्वीर या प्रतिमा, चौकी और इस पर बिछाने के लिए लाल वस्त्र, माता की लाल चुनरी, लाल फूल, कलश, जौ, गंगाजल, रोली, चावल, 5 तरह के फल, धूप, दीप आदि को लें. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा करने के साथ ही घटस्थापना करनी चाहिए.

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