देश के लिये जान देने वालों का इस तरीके से किया जाता है अंतिम संस्कार…

देश के लिये जान देने वालों का इस तरीके से किया जाता है अंतिम संस्कार

देश के लिये जान देने वालों का इस तरीके से किया जाता है अंतिम संस्कार…


रिपोर्ट: अनुष्का सिंह


नई दिल्ली: जीवन में मृत्यु तो निश्चित है, आज नही तो कल हर किसी को मरना है। हर दिन सैकड़ों लोग इस दुनिया को अलविदा कह देते हैं। लेकिन जो लोग देश के लिये, अपनी धरती माँ के लिये अपने प्राण त्याग ते हैं। वो लोग मरते नही, वो अमर हो जाते है। मरने के बाद भी उनका दाह संस्कार आम नही होता, एक बड़े ही खास तरीके से उन्हे अलविदा किया जाता है। तो इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि देश के लिए शहीद होने वालो का कैसे किया जाता है अंतिम संसकार।

दरअसल जब भारतीय सेना के अधिकारी या जवान जब देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करते हैं, तो उनकी अंतिम विदाई पूरे राजकीय सम्मान के साथ की जाती है। बड़े ही खास तरीके से उनकी इस यात्रा को यादगार बनाया जाता है। उनका अंतिम संस्कार किया जाता है। तो आइए समझते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया।

अंतिम संस्कार की प्रक्रियापहले तो बता दे कि इस पूरी प्रक्रिया को राजकीय सम्मान के साथ किया जाता है। सबसे पहले शहीद सैन्यकर्मी का पार्थिव शरीर उनके स्थानीय आवास पर भेजा जाता है। शव के साथ में सेना के जवान भी होते हैं। जिसके बाद पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा जाता है। आपको बता दे कि भारतीय झंडा संहिता 2002 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को सिर्फ सैनिकों या राजकीय सम्मान के वक्त ही शव को लपेटने के रूप में इस्तेमाल करमे की अनुमती है।

क्या राष्ट्रीय ध्वज को शव के साथ जलाया या दफनाया जाता है?

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

जी नहीं, राष्ट्रीय ध्वज को शव के साथ जलाया या दफनाया नही जाता। अंतिम संस्कार से पहले ही यह झंडा शहीद के घरवालों को दे सौप दिया जाता है। इस झंडे को समेटने का भी खास तरीका रखा गया है, जिसमें झंडे का अशोक चक्र सबसे ऊपर होता है। साथ ही आपको बता दे कि पार्थिव शरीर को झंडे से लपटने का भी एक खास नियम होता है। जिसके चलते झंडे को शव पेटिका पर रखा जाता है और झंडे का केसरिया भाग शव पेटिका के आगे वाले हिस्से की तरफ होता है। यानी इसे सीधा रखा जाता है, चादर की तरह इसे कभी नही ओढाया जाता।

खास तरीके की सलामी।

खास तरीके की सलामी। बता दे कि शोक के चलते अंतिम संस्कार के दौरान मिलिट्री बैंड की ओर से ‘शोक संगीत’ बजाया जाता है साथ ही बाद मे बंदूकों की सलामी भी दी जाती है। गौरतलब है कि बंदूकों की सलामी का भी एक अलग तरीका होता है। जिसके तहत बंदूकें खास तरीके से झुकाई और उठाई जाती हैं।

 आपको बता दे कि ऐसा ही राजकीय सम्मान, हेलीकॉप्टर हादसे में अपनी जान गंवाने वाले देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को आज दिया जाऐगा। आज यानी की शुक्रवार को उन्का अंतिम संस्कार है। इसी सम्मान के चलते CDS जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के पार्थिव शरीर को उनके आवास लाया गया है, जहां पर आम जनता को उनके अंतिम दर्शन करने का मौका दिया जाऐगा। जिसके बाद शाम 4 बजे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा।.

CDS बिपिन रावत

 

  • https://todayxpress.com
  • LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here