Management Lesson from Lord Hanuman: हनुमान जी से सीखें मैनेजमेंट के ये गुण मिलेगी आपार सफलता…

 Management Lesson from Lord Hanuman
 Management Lesson from Lord Hanuman

Management Lesson from Lord Hanuman: हनुमान जी से सीखें मैनेजमेंट के ये गुण मिलेगी आपार सफलता

रामभक्त हनुमान के बारे में कौन नहीं जानता, उनकी शक्ति और भक्ति की हमेशा तरीफ होती है… वहीं, उनमें कई ऐसे गुण भी थे, जिन्हें मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को पढ़ाया भी जाता है… आज हम आपको बताने जा रहे हैं हनुमान जी ऐसे मैनेजमेंट के गुण, जिन्हें अपने जीवन में उतार कर आप सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं… इन्हें सिर्फ मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले ही नहीं, बल्कि हर एक व्यक्ति को सीखना चाहिए… ये तो सभी जानते हैं कि राम भक्त हनुमान जी रामायण के सबसे महत्वपूर्ण पात्र हैं, या यूं कहे कि हनुमान जी रामायण के सुपर हीरो हैं… हम सभी भगवान रूप में उनकी पूजा करते हैं… साथ ही हनुमान जी से हम वो गुण सीख सकते हैं जिन्हें अपनाकर हम अपनी ज़िन्दगी में एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं… बिना हनुमान जी के रामायण की कल्पना नहीं की जा सकती, यानी हुनमान जी के बिना रामायण अधूरी है.. हनुमान जी परम भक्त, परम मित्र और एक वफादार साथी है… इतने बलवान होते हुए भी, इतने शक्तिमान होते हुए भी, इतने बुद्धिमान होते हुए भी अहंकार से बहुत दूर हैं… कहा जाता है कि भगवान के बाकी सभी अवतारों के उलट वो अमर हैं… तुलसी दास द्वारा लिखी गई हनुमान चालीसा में हनुमान जी की उदारता, महानता, उनकी निष्ठा, प्रेम और मित्रता का सम्मान करने के साथ-साथ उनकी बुद्धि, शक्ति, भक्ति सभी के विषय में लिखा गया है… हनुमान जी के जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं जो हमारी बेहतर ज़िन्दगी के लिए, हमारी सफलता के लिए बेहत जरूरी है…

सीखने की लगन यानी (Passion for Learning)

सबसे पहली सीख आप हनुमानजी से सीखने की लगन क्या होती है ये सीख सकते हैं… दरअसल हनुमानजी ने बचपन से ही सभी से कुछ ना कुछ सीखते रहे, कहते हैं उन्होंने अपनी माता अंजनी और पिता केसरी के साथ ही धर्मपिता पवनपुत्र से भी शिक्षा ग्रहण की थी.. उन्होंने शबरी के गुरु ऋषि मतंग से भी शिक्षा ली थी और भगवान सूर्य से उन्होंने सभी तरह की विद्या ग्रहण की…

कार्य करने की कुशलता यानी (Working Efficiency)

अगर इंसान किसी भी कार्य को कुशलता से करें तो जरुर सफल होता है… हनुमानजी के कार्य करने की शैली अनूठी थी साथ वे कार्य में कुशल तो थे ही बेहद निपुण भी थे, उन्होंने सुग्रीव की सहायता के लिए उन्हें श्रीराम से मिलाया और राम की सहायता के लिए उन्होंने वो सब कुछ अपनी बुद्धि कौशल से किया जो प्रभु श्रीराम ने आदेश दिया… वे कार्य में कुशल प्रबंधक हैं… हनुमानजी ने सेना से लेकर समुद्र को पार करने तक जो कार्य कुशलता और बुद्धि के साथ किया वो उनके बेहतरीन मैनेजमेंट को दर्शाता है…

राइट प्लानिंग, वैल्यूज और कमिटमेंट

यानी कोई भी काम करने से पहले उसकी पूरी प्लानिंग करें और उसके बाद उस पर अमल करें… हनुमानजी को जो कार्य सौंपा जाता था पहले वह उसकी प्लानिंग करते थे और फिर उस पर अमल करते थे… जैसे श्रीराम ने लंका भेजते वक्त हनुमानजी से यही कहा था कि ये अंगुठी माता सीता को दिखाकर कहना की राम जल्द ही आएंगे लेकिन हनुमानजी ही जानते थे कि समुद्र को पार करते वक्त बाधाएं आएगी और लंका में प्रवेश करते वक्त भी वो जानते थे कि क्या होने की संभावना है… इसलिए उन्होंने कड़े रूप में रावण को राम का संदेश भी दिया, विभीषण को राम की ओर खींच लाएं, अक्षयकुमार का वध भी कर दिया और माता सीता को अंगुठी देकर लंका भी जला डाली और सकुशल लौट भी आए… ये सभी उनकी कार्य योजना का ही हिस्सा था…यानी कपड़ा भी उनका, तेल भी उनकी और जली किसकी रावण की…

दरअसल बुद्धि के साथ सही प्लानिंग करने की उनमें गजब की क्षमता है… हनुमानजी का प्रबंधन क्षेत्र बेहद बड़ा है, हनुमानजी से आप ये सीख सकते हैं कि डेडिकेशन, कमिटमेंट, और डिवोशन से हर बाधा पार की जा सकती है… लाइफ में इन वैल्यूज का महत्व कभी कम नहीं होता… जैसे लंका पहुंचने से पहले उन्होंने पूरी रणनीति बनाई… असुरों की इतनी भीड़ में भी विभीषण जैसा सज्जन ढूंढा, उससे मित्रता की और सीता माता का पता लगाया, डर फैलाने के लिए लंका को जलाया.. विभीषण को प्रभु राम से मिलाया, तो आप समझ सकते है कि किस तरह उन्होंने पूरे मैनेजमेंट के साथ काम को अंजाम दिया..

दूरदर्शिता

आपको हमेशा दूरदर्शी होना चाहिए… ये हनुमानजी की दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने सहज और सरल बाचचीत के अपने गुण से कपिराज सुग्रीव से श्रीराम की दोस्ती कराई और बाद में उन्होंने विभीषण की श्रीराम से दोस्ती कराई, सुग्रीव ने श्रीराम की मदद से बालि को मारा तो श्रीराम ने विभीषण की मदद से रावण को मारा. हनुमानजी की कुशलता और चतुरता के चलते ही ये सब संभव हो पाया…

कुशल नीति

अगर आप चाहे तो कुशल नीति से काफी कुछ हासिल किया जा सकता है… राजकोष और पराई स्त्री को हासिल करने के बाद सुग्रीव ने श्रीराम का साथ छोड़ दिया था लेकिन हनुमानजी ने साम, दाम, दण्ड, भेद नीति का प्रयोग कर श्रीराम के कार्यों के प्रति उनकी जिम्मेदारी और दोस्ती के धर्म की याद दिलाई… इसके अलावा ऐसे कई बार मौके आए जब हनुमानजी को नीति का प्रयोग करना पड़ा … हनुमानजी मैनेजमेंट की ये सीख देते हैं कि अगर लक्ष्य महान हो और उसे पाना सभी के हित में हो तो हर तरह की नीति अपनाई जा सकती है…

साहस

कहते हैं कि व्यक्ति को जहां छल, कपट और कुटिलता से दूर रहना चाहिए वहीं व्यवहार में पारदर्शिता अपनी बात को कहने का नैतिक साहस भी होना चाहिए…
हनुमानजी में अदम्य साहस है… वे किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों से विचलित हुए बगैर पूरी इच्छाशक्ति से आगे बढ़ते गए… रावण को सीख देने में उनकी निर्भीकता और दृढ़ता देखने को मिली… उनमें न कहीं दिखावा है, न छल कपट, व्यवहार में पारदर्शिता है, कुटिलता नहीं.. उनमें अपनी बात को कहने का नैतिक साहस हैं… उनके साहस और बुद्धि कौशल और नीति की प्रशंसा तो रावण भी करता था…

लीडरशिप

एक सच्चा लीडर वही होता है जो अपनी टीम को साथ लेकर चलें और वक्त आने पर सही फैसला ले सके… हनुमानजी श्रीराम की आज्ञा जरूर मानते थे लेकिन वे वानरयूथ थे यानी वो संपूर्ण वानर सेना के लीडर थे… सबको साथ लेकर चलने की क्षमता को श्रीराम पहचान गए थे.. कठिनाइयों में जो निर्भयता और साहसपूर्वक साथियों का सहायक और मार्गदर्शक बन सके लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिसमें उत्साह, जोश, धैर्य और लगन हो, कठिनाइयों पर विजय पाने, परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर लेने का संकल्प और क्षमता हो, सबकी सलाह सुनने का गुण हो वही एक सच्चा लीडर बन सकता है… उन्होंने जामवंत से मार्गदर्शन लिया और उत्साह पूर्वक रामकाज किया… सबको सम्मानित करना, सक्रिय और ऊर्जा संपन्न होकर कार्य में निरंतरता बनाए रखने की क्षमता भी कार्यसिद्धि का सिद्ध मंत्र है…

हर परिस्थिति में मस्त रहना

इंसान को हर परिस्थिति में मस्त रहना चाहिए… हनुमानजी के चेहरे पर कभी भी चिंता, निराशा या शोक नहीं देख जा सकता… वह हर हाल में मस्त रहते हैं… हनुमानजी कार्य करने के दौरान कभी गंभीर नहीं रहे उन्होंने हर कार्य को एक उत्सव और खेल की तरह लिया… उनमें आज की सबसे अनिवार्य मैनेजमेंट क्वॉलिटी है कि वे अपना हंसमुख स्वभाव हर सिचुएशन में बनाए रखते हैं… जब वे लंका गए तब उन्होंने मद मस्त होकर खूब फल खाए और बगीचे को उजाड़कर अपना मनोरंजन भी किया और साथ ही रावण को संदेश भी दे दिया… इसी तरह उन्होंने द्वारिका के बगीचे में भी खूब फल खाकर मनोरंजन किया था और अंत में बलराम का घमंड भी चूर कर दिया था… उन्होंने मनोरंजन में ही कई घमंडियों का घमंड भी तोड़ दिया था…

शत्रु पर निगाहें

हमेशा आपकी निगाहें अपने शत्रु पर होनी चाहिए… हनुमानजी किसी भी परिस्थिति में कैसे भी हो.. भजन कर रहे हो या कहीं आसमान में उड़ रहे हैं या फल फूल खा रहे हों, लेकिन उनकी नजर अपने शत्रुओं पर जरूर रहती है… विरोधी के असावधान रहते ही उसके रहस्य को जान लेना शत्रुओं के बीच दोस्त खोज लेने की दक्षता दिखाई देती है… उनके हर कार्य में थिंक और एक्ट का अद्भुत कॉम्बिनेशन है…

विनम्रता

इंसान को हमेशा हम्मबल यानी विनम्रता बनाए रखाना चाहिए चाहे कोई भी परिस्थिती क्यों ना हो…हनुमानजी महा सर्वशक्तिशाली थे, हनुमानजी के लंका को उजाड़ा, कई असुरों का संहार किया, शनिदेव का घमंड चूर चूर किया, पौंड्रक की नगरी को उजाड़ा, भीम का घमंड किया तोड़ा, अर्जुन का घमंड भी चूर किया, बलरामजी का घमंड भी उन्होंने तोड़ा और संपूर्ण जगत को ये जता दिया कि वे क्या हैं लेकिन उन्होंने कभी भी विनम्रता और भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा… हनुमानजी रावण से भी विनम्र रूप में ही पेश आए तो अर्जुन से भी, सभी के सामने विनम्र रहकर ही उन्हें समझाया लेकिन जब वे नहीं समझे तो उन्होंने अपना पराक्रम दिखाया, अगर आप टीमवर्क कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं फिर भी एक प्रबंधक का विनम्र होना जरूरी है, अन्यथा ये समझना होगा कि उसका घमंड भी कुछ ही समय के लिए है…

अंजनीपुत्र हनुमानजी एक कुशल प्रबंधन थे… मन, कर्म और वाणी पर संतुलन यह हनुमान जी से सीखा जा सकता है… ज्ञान, बुद्धि, विद्या और बल के साथ ही उनमें अपार विनम्रता भी सीखी जा सकती है…

 


यह भी पढ़ें-

भगवान श्री राम से सीखे लीडरशिप के गुण, जीवन में नहीं होंगे असफल…

  • https://todayxpress.com
  • LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here