Parenting: भारतीय पैरेंट्स अपनी बेटी की परवरिश में अनजाने में ये 5 गलतियां कर देते है, पछताना पड़ता है बाद में…

Parenting: भारतीय पैरेंट्स अपनी बेटी की परवरिश में अनजाने में ये 5 गलतियां कर देते है, पछताना पड़ता है बाद में...
Parenting: भारतीय पैरेंट्स अपनी बेटी की परवरिश में अनजाने में ये 5 गलतियां कर देते है, पछताना पड़ता है बाद में...

Parenting: भारतीय पैरेंट्स अपनी बेटी की परवरिश में अनजाने में ये 5 गलतियां कर देते है, पछताना पड़ता है बाद में…


Report By- Khushi Sinha


International Women’s Day 2022: माता-पिता अपनी बेटी के लालन-पालन में कुछ गलतियां नहीं करना चहते. बचपन से ही लड़कियों को लड़कों के बराबर अधिकार देना चाहिए ताकि दोनों ही घर के काम को सिख पाए. खिलौनों की खरीद में भी प्राथमिकता देनी चाहिए बेटी की पसंद को, उसके लिंग को नहीं.

International Women’s Day 2022: हर साल हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों की बात करने के लिए मनाते हैं. लेकिन महिलाओं के प्रति आज भी समाज में भेदभाव पूरी तरह से नहीं हो पाया है खत्म. हालांकि माता-पिता कोशिश करते हैं आधुनिक समाज में कि वो समान अधिकार दें अपने बेटे-बेटियों को और कोई भेदभाव न करें उनके लालन-पालन में. इसके बावजूद, माता-पिता अनजाने में ही बेटियों की परवरिश में कई गलतियां कर बैठते हैं. तो आज हम आपको बेटी के लालन-पालन के दौरान क्या करने से बचना चाहिए ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में बता रहे हैं.

केवल गुड़िया और मेकअप किट बेटी के लिए खरीदना

अक्सर हम ऐसा देखे है कि खिलौनों के आधार पर बहुत से लोग बेटी-बेटा में बड़ा फर्क करते है. लड़की है तो गुड़िया से खेलेगी और लड़का है तो टॉय, गन या वीडियो गेम आदि से ही खेलेगा.बच्चे किस खिलौने से खेलेगा ये तो उसकी पसंद ना पसंद पर निर्भर होना चाहिए. हमें बच्चे की लिंग को लेकर इस तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए. हम सब लड़कियों को बचपन से ही एक सांचे में ढालने की कोशिश करते हैं और ये बहुत गलत है.

केवल किचन का काम सिखाना बेटी को

हम इंसानों को जिंदा रहने के लिए खाना बेहद जरूरी है इसलिए अपने बेटे-बेटी दोनों को ही खाना बनाना सिखाए. किचन का काम करना सिर्फ लड़कियों के लिए जरूरी नहीं है बल्कि लड़कों को भी किचन का काम आना चाहिए. अभी के समय में ज्यादातर लड़कियां वर्किंग होती हैं और ऐसे में हमे सिर्फ उन्हें ही किचन का काम सिखाने पर जोर नहीं देना चाहिए. पैरेंट्स से परवरिश में ये फर्क करने से बाद में बच्चों की शादीशुदा जिंदगी पर बहुत असर डालेगा.

न करें बेटी के सामने किसी तरह का फर्क

हम कई बार ऐसा देखते है कि भाई-बहन अगर कोई गेम खेल रहे हैं और उस गेम में भाई ने कोई चीटिंग की तो पैरेंट्स बेटी से कहते हैं कि वो भाई की चीटिंग को माफ कर दे क्योंकि वो एक लड़का है और वो एक लड़की है तो उसे लड़ाई करना बिलकुल भी शोभा नहीं देता है. ये बेहद ही गलत है. इसकाप्रभाव लड़की पर बेहद ही बुरा पड़ता है. गलती किसी की भी हो माता-पिता को उसे प्यार से समझाना चाहिए, न कि बेटे को सही साबित करना चाहिए.माता-पिता को बचपन से ही अपने दोनों बच्चों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए.

ये उसे तय करने दें कि वो क्या खेलेगी

बहुत से माता-पिता अपनी बेटियों को कबड्डी, क्रिकेट, फुटबॉल, आदि खेल को खेलने से रोकते हैं और ये बोलते की लड़कों का खेल है ये सब. इससे लड़की के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रभाव पड़ता है. लड़की को कौन सा खेल खेलना, ये उसे ही तय करने दे. खेलों में किसी भी तरह का भेदभाव न करें और अपनी बच्ची की रूचि के हिसाब से ही उसे अपना बचपन जीने दें.

बच्ची देर से बोलना शुरू करे तो परेशान न हों

ऐसा माना जाता है कि लड़कों की तुलना में लड़कियां बहुत ज्यादा और जल्दी बोलना शुरू करती हैं. पर कही आपकी बेटी जल्दी नहीं बोलना शुरू कर रही तो परेशान बिलकुल भी न हों और उसे थोड़ा समय दें. ऐसा कुछ मामलों में देखा गया है की लड़कियां देर से बोलना शुरू करती हैं, इसलिए घबराएं नहीं.

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