Film Chhori Review: जानिए फिल्म ‘छोरी’ को कौन देख सकता है कौन नहीं?

Film Chhori Review
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Film Chhori Review: जानिए फिल्म ‘छोरी’ को कौन देख सकता है कौन नहीं?


Chhori Film Review by Rj Amit Soni


Film Chhori Review: फिल्म ‘छोरी’ (Chhori) एक रोमांच और हॉरर फिल्म है…अगर हॉरर जॉनर की बात करें तो यह फिल्म किसी हवा के झोंके की तरह आती है… फिल्म ‘छोरी’ के निर्देशक विशाल फूरिया ने अपनी ही मराठी फिल्म ‘लपाछपी’ के रीमेक के तौर पर इसे बनाया है… फिल्म में जो रोल उषा नायक और पूजा सावंत ने किए, उनको इस हिंदी संस्करण में मीता वशिष्ठ और नुसरत भरुचा ने निभाया है… फिल्मे की कहानी के डिटेल्स और इसमें हॉरर की बात करने का मतलब होगा फिल्मा के बारे में स्पॉसइलर देना। इसलिए जो जानना जरूरी है, वह यह है कि एक प्रेग्नें ट महिला है। एक उजाड़ घर है। बच्चे हैं और एक ऐसा गांव है, जहां बहुत कम लोग रहते हैं। फिल्मै में कैरेक्टऐर्स बहुत ज्या दा नहीं हैं, इसलिए पर्दे पर कहानी को रोमांच और चौंकाने वाले सीन्सट से भरा गया है। बतौर ऑडियंस  ‘छोरी’ आपको बांधे रखती है।

 

लेकिन साथ ही एक जरूरी मेसेज देती है। क्ला इमेक्सल तक आते-आते यह फिल्म  आपके गले में एक गांठ छोड़ देती है। कन्या भ्रूण हत्या और भ्रूण हत्या की अमानवीय प्रथा पर एक पूरी ताकत से चोट करती है।  फिल्म की लीड कलाकार नुसरत भरुचा ने भी ये साबित किया  है कि छोरियां छोरों से कम नहीं होतीं और चाहें तो फिल्म का पूरा भार अपने कंधों पर भी उठा सकती हैं। इस लिहाज से नुसरत की तारीफ भी करनी चाहिए कि उन्होंने इस फिल्म में काम करने की बात मानी। फिल्म में पूरा फोकस उन्हीं पर है। बाकी किरदार आते जाते रहते हैं। एक गर्भवती युवती की चाल ढाल, हाव भाव लाने की वह कोशिश भी खूब करती हैं लेकिन आठ महीने के गर्भ का जो सुख देने वाला दर्द मां के चेहरे पर दिखता है, वह यहां प्रकट नहीं होता। ढाई तीन सौ किलोमीटर का सड़क के रास्ते सफर करने के दौरान भी। नुसरत को इस फिल्म की शूटिंग करने से पहले रामगोपाल वर्मा की ‘भूत’ देखनी चाहिए थी। किसी डरावनी फिल्म में नायिका के भाव प्रकटन की इसे टेक्स्ट बुक माना जा सकता है। हेमंत का किरदार निभाने वाले सौरभ गोयल फिल्म में नैचुरल लगे, लेकिन उन्हें स्क्रीन पर ज्यादा समय नहीं मिला. राजेश जैस ने कजला का किरदार अच्छे से निभाया. कम स्क्रीन स्पेस में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग से ऑडियंस का ध्यान अपनी तरफ खींचा है  सिनेमेटोग्राफर की बात करे  अंशुल चोबे ने कैमरे से जबरदस्ती और मुश्िोग ल दिखने वाला काम किया है। खासकर कैमरे को कहानी में एक कैरेक्टशर की तरह रखकर ऑडियंस  में डर और तनाव पैदा करने का काम तारीफ के काबिल है। फिल्म में कई सीन ऐसे हैं, जहां आपको गुस्सा  भी आएगा और दुख भी होगा। एक ऐसा ही सीन है, जहां सूखे कुएं में कई बच्चों की लाश है। या वो सीन जब तीन मृत बच्चे सुनेनी से कहते हैं, 

 

इसी वजह से छोरी को देखने में मजा आया. साथ ही ये फिल्म आपको सामाजिक बुराइयों के बारे में भी सोचने पर मजबूर करती है जो समय के साथ बनी रहती है. अगर आपको हॉरर फिल्में पसंद हैं तो आप इसे देख सकते हैं. काफी समय से बॉलीवुड में कई हॉरर फिल्में रिलीज हुई हैं, लेकिन उनमें हॉरर की कमी दिखती है. इस फिल्म में आपको वो कमी नहीं दिखेगी

इस फिल्म तो मिलते है Today X press की तरफ से 5  मैं से 4  स्टार।।।

 


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