वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 80वां जन्मदिन, जानिए गूगल ने केसे दिया सम्मान!

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 80वां जन्मदिन, जानिए गूगल ने केसे दिया सम्मान!
वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 80वां जन्मदिन, जानिए गूगल ने केसे दिया सम्मान!

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 80वां जन्मदिन, जानिए गूगल ने केसे दिया सम्मान!


Report By- Vanshika Singh


नई दिल्ली- आज विश्व के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 80वां जन्मदिन है. उनका जन्म 8 जनवरी 1942 को यूनाइटेड किंगडम के एक नगर ऑक्सफोर्ड में हुआ था. स्टीफन हॉकिंग का आज जन्मदिन गूगल ने एक विशेष एनिमेटेड डूडल के साथ मनाया जा रहा है. इस डूडल पर क्लिक करने से स्टीफन की खुद की कंप्यूटर जनित आवाज पर ढाई मिनट का एक वीडियो दिखाता है जो दूनियां में उनके योगदान और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के साथ जीवन को दिखाता है. स्टीफन हॉकिंग अकेले एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने डॉक्टरों की भविष्यवाणी को गलत साबित कर दिया था. वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग यहीं नहीं रुके, उनहोने यह भी कहा था कि दुनिया में भगवान नामक कोई नहीं है, साथ ही कहा कि कोई हमारी किस्मत नहीं लिखता है. दरअसल स्टीफन हॉकिंग नास्तिक थे.

आपको बता दें कि वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को एमियोट्रोफिक लेटराल स्क्लेरोसिस (एएलएस) बीमारी थी. वह 21 साम की उम्र में ही इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ गए थे. इस एएलएस बीमारी में इनसान का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगता है. जिसके बाद धीरे-धीरे पूरे शरीर का काम करना बंद हो जाता है. जब इस बीमारी के इलाज के लिए वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग अस्पताल पहुचे तो वहां के डॉक्टरों ने इन्हें कह दिया था कि वह ज्यादा से ज्यादा 2 साल तक ही जिंदा रह सकेंगे. लेकिन स्टीफन की मजबूत इच्छाशक्ति से डॉक्टरों की वह भविष्यवाणी झूठी साबितहो गई थी. उस समय स्टीफन हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर शरीर का कोई भी हिस्सा काम नहीं करता था. इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक बन गए.

आपको बता दें कि वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने स्पेस साइंस में अपना बड़ा योगदान दिया है. उनकी कुछ उपलब्धियों में कॉस्मिक इन्फ्लेशन थ्योरी, ब्लैक होल का सिद्धांत, सिंगुलैरिटी का सिद्धांत जैसी कई उपलब्धियां शामिल है. वहीं अपनी अखिरी सांस लेते हुए वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने आखिरकार भगवान के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे. जहां स्टीफन का कहना था कि “21वीं सदी के खत्म होने तक वैज्ञानिक भगवान के दिमाग को समझने लगेंगे और इस यूनिवर्स को किसी ने भी नहीं बनाया है”.

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