पाकिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव, तालिबान को नहीं है आईएसआई पर भरोसा…

पाकिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव, तालिबान को नहीं है आईएसआई पर भरोसा...
पाकिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव, तालिबान को नहीं है आईएसआई पर भरोसा...

पाकिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव, तालिबान को नहीं है आईएसआई पर भरोसा…


Report By- Vanshika Singh


अंतरराष्ट्रीय- पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हाल ही में हुई घटनाओं ने डूरंड रेखा के अनसुलझे मुद्दों को उठाया है, जिसके वजस से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया है. दरअसल, ब्रिटिश काल की डूरंड लाइन पर बाड़ लगाने के लिए दोनों पड़ोसि देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसको काबुल औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में कोई मान्यता नहीं देता है. 2021 के अगस्त में काबुल के अधिग्रहण के बाद पड़ोसि देश, पाकिस्तान ने डूरंड लाइन के मुद्दे को शांत करने की कोशिश की थी.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से आतंकवादी हमले की चेतावनी के बाद से पाकिस्तानी नेतृत्व ने अफगानी तालिबान का समर्थन करना शुरू कर दिया. वर्चुअल थिंक-टैंक ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के एक अंश में कहा गया है कि “काबुल में तालिबान के अधिग्रहण के महीनों के अंदर ही पाकिस्तान को अब परिणाम भुगतना पड़ रहा है. जब तालिबान अफगानिस्तान में अपने राजनीतिक रूप से खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहें है, तब डूरंड लाइन का मुद्दा तालिबान और पाकिस्तानी सेना की ओर से बनाई गई सीमा बाड़ के कुछ हिस्सों को बिगडने के बाद फिर से उभर आया है.

विशेषज्ञों ने इस बात की संभावनाओं का अनुमान लगाया है कि दोनों देशों की सीमा पर मौजूदा सीमा संघर्ष संभावित रूप से काबुल और इस्लामाबाद के बीच संबंधों में विवाद का कारण बन सकता है. इसके अलावा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कदमों से भी तालिबान नाराज है. बताया जा रहा है कि तालिबान अब चाहकर या न चाहकर भी पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई पर भरोसा नहीं कर पा रहा है.

दरअसल, पाकिस्तान ने जब से तहरीक-ए-तालिबान के मोस्ट वांटेड आतंकी खालिद बटली को अफगानिस्तान में मार गिराया है, तब से ही तालिबान आईएसआई से नाराज चल रहा है. मोहम्मद खुरासानी के मारे जाने के बाद बड़ा सवाल यह उठाया लगा है कि क्या पाकिसतान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के जरिए अफगानिस्तान में सक्रिय है? क्या पाकिसतान अपने गुप्तचरों को सीमा से अफगानिस्तान भेज रहा है. वहीं पाकिस्तानी एनएसए यूसुफ ने अपनी दो दिनों की यात्रा को रद्द कर दिया था, क्योंकि काबुल में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध चल रहा था.

राजनयिक सूत्रों के नुताबिक यूसुफ ने शर्मिंदगी से बचने के लिए यात्रा को रद्द किया था. यूसुफ की इस यात्रा में दोनों देशों की सीमा पर बाड़ लगाना एक प्रमुख चर्चा करने का विषय था. आपको बता दे कि पाकिस्तान ने 2,670 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगभग 90 फीसदी बाड़ लग चुकि है, जिससे आतंकवादियों के लिए आसान रास्ता रोका जा सके.

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