शास्त्री की डिग्री को अमान्य करना संस्कृत पर बड़ा कुठाराघात- राजपुरोहित मधुर जी

शास्त्री की डिग्री को अमान्य करना संस्कृत पर बड़ा कुठाराघात- राजपुरोहित मधुर जी
शास्त्री की डिग्री को अमान्य करना संस्कृत पर बड़ा कुठाराघात- राजपुरोहित मधुर जी

शास्त्री की डिग्री को अमान्य करना संस्कृत पर बड़ा कुठाराघात- राजपुरोहित मधुर जी


Report By- Vanshika Singh


उत्तर प्रदेश- राष्ट्रीय मानव धर्म सेवा संगठन के अध्यक्ष और राष्ट्रीय परशुराम परिषद के धर्म प्रमुख राजपुरोहित मधुर जी ने धर्मगुरु धर्म शिक्षक के पद पर शास्त्री उपाधि धारक छात्रों को मान्यता न मिलने पर कठोर शब्दों में निंदा करते हुए इस प्रस्ताव को सर्वथा अनुचित बताया है. राजपुरोहित मधुर जी ने कहा है कि “इस विषय को लेकर संस्कृत भाषा प्रेमियों और संस्कृत जगत के विद्वानों में अत्यंत आक्रोश है”. वहीं राजपुरोहित जी ने कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि “पारंपरिक विषयों के साथ इस तरह का अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इस विषय को लेकर राष्ट्रीय परशुराम परिषद की तरफ से रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी को पत्र लिखा है और सरकार को इसके बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए”. साथ ही मधुर जी का कहना है कि संबंधित विषयों को ध्यान में रखते हुए शास्त्री जी की उपाधि धारक समस्त छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए जिससे संस्कृत के छात्रों का मनोबल बढ़े. कैसे मदरसा बोर्ड को वैलिड बताकर संस्कृत बोर्ड को नकार सकते है??

सेना में जब ब्राह्मण होता है. तब किसी भी प्रकार का भटकाव अगर सेना के सिपाहियों को होता है तो वह ब्राह्मण ही है जो मंदिरों में पूजा पाठ करके देश में सभी सेवा करने वाले सैनिकों के लिए उनके साथ साथ रहकर भगवान से प्रार्थना भी करता है और सबके मंगल होने की कामना करता है.

भारत में स्थापित संपूर्ण संस्कृत विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शास्त्री ऑनर्स( बीए समकक्ष )आचार्य एम ए समकक्ष की मान्यता है. फिर सेना में इस प्रकार का भेदभाव अपनाया जाना सर्वथा अनुचित है. संस्कृत भाषा के प्रेमियों के साथ संस्कृत जगत के लिए बहुत ही निंदनीय निर्णय है. राजपुरोहित मधुर जी ने पत्र लिखते हुए पुनः शास्त्री उपाधि धारकों को परीक्षा में शामिल किए जाने की मांग की है और साथ ही कहा है कि भारत के सभी संस्कृत विश्वविद्यालय में मान्यता प्राप्त है इसके बावजूद भी अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव का रवैया अनुचित है.

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