BJP के इस ‘फॉर्मूले से यूपी में अखिलेश यादव का सीएम बनना तय!

BJP के इस 'विनिंग फॉर्मूले को अखिलेश ने अपनाया
BJP के इस 'विनिंग फॉर्मूले को अखिलेश ने अपनाया

BJP के इस ‘फॉर्मूले से यूपी में अखिलेश यादव का सीएम बनना तय!

TODAY स्पेशल: BJP ने साल 2017 में समाजवादी पार्टी के खिलाफ जो फॉर्मूला अपनाया था उससे BJP ने अखिलेश यादव को सत्ता बहार कर दिया था और सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था…आखिर ऐसा क्या किया था BJP ने 2017 में जिसे अपना कर BJP ने यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस को धाराशाही कर दिया था… आज वो BJP का ‘विनिंग फॉर्मूला बताने जा रहे हैं जो यूपी में वो खेल कर सकता है जिससे यूपी में सत्ता हासिल हो सकती है… दरअसल साल 2017 में BJP ने गैर-यादव ओबीसी जातियों को जोड़कर अखिलेश यादव को सत्ता से बाहर कर दिया था… और अब अखिलेश यादव भी 2022 के चुनाव में उसी फॉर्मूले के तहत BJP के खिलाफ गैर-ठाकुर सवर्ण जातियों को एक कर सूबे की सत्ता में वापसी का प्लान बना रहे हैं…

 

ब्राह्मणों की नारजगी बढ़ा रही BJP की चिंता!

उत्तर प्रदेश की सत्ता को पाने के लिए या यूं कहे हथियाने के लिए बीजेपी और सपा के बीच शह-मात का खेल चल रहा है… 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिस सियासी फॉर्मूले के जरिए सपा को सत्ता से बाहर कर दिया था… उसी फॉर्मूले की तर्ज पर इस चुनाव में BJP के खिलाफ अखिलेश यादव राजनीतिक चक्रव्यूह रच रहे हैं… जैसे महाभारत में अभिमन्यू के लिए चक्रव्यूह रचा गया था वैसे ही सपा ने अपनी रणनिती को धार दी है… आपको याद ही होगा अगर नहीं याद है तो चलो आपको बतातें हैं कि बीजेपी ने साल 2017 में सपा के खिलाफ गैर-यादव ओबीसी जातियों को एकजुट किया था और उसका नतीजा तो सबने देखा ही है… वहीं अब अखिलेश उसी तरह से योगी के खिलाफ गैर-ठाकुर सवर्ण जातियों को एक कर सूबे की सत्ता में वापसी की जुगत भिड़ा रहे हैं…

 

ब्राह्मण समाज को साधने में जुटे सपा-बसपा 

बता दें कि 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया था… सूबे में करीब 15 साल के बाद बाद योगी आदित्यनाथ के रूप में सवर्ण समाज की ठाकुर जाति से कई सीएम मिला थे… सीएम योगी की ताजपेशी के साथ ही ये समझा जाने लगा था कि उत्तर प्रदेश में ठाकुर जाति प्रभावशाली हो गई है, क्योंकि योगी खुद भी उसी ठाकुर जाति से आते हैं… जिसके बाद विपक्षी दलों ने सीएम योगी को ठाकुर परस्त और ब्राह्मण विरोधी करार देना शुरू कर दिया और अब इस चुनाव में बीजेपी के लिए ये सिरदर्द साबित हो सकता है… बतां दे कि यूपी विधानसभा चुनाव में सपा से लेकर बसपा तक योगी आदित्यनाथ को ठाकुर परस्त सीएम बताकर ब्राह्मण समाज को साधने में जुटे हैं… जिसके चलते सपा और बसपा दोनों की कोशिश यूपी चुनाव को ठाकुर बनाम ब्राह्मण बनाने चक्कर में चक्कर काट रहे हैं…जी हां टीक सुना आपने दरअसल सपा और बसपा दोनों ही यूपी चुनाव को ठाकुर बनाम ब्राह्मण बनाने के चक्कर में चक्कर काट रहे हैं… यही कारण है कि समाजवादी पार्टी, चुनाव को अखिलेश बनाम योगी आदित्यनाथ बनाना चाहती है जबकि बीजेपी चाहती है कि योगी बनाम अखिलेश के बजाय ये चुनाव मोदी बनाम अखिलेश बना दिया जाए…

 

अखिलेश यादव ने बदली चुनावी रणनीति 

राजनीतिक पंडितों की माने तो यूपी में जब अखिलेश यादव की सरकार थी तो प्रदेश में यादव समाज के रवैए और सपा के जातिवाद से लोग दुखी थे और अब यूपी में योगी की सरकार है तो ठाकुर के कामकाज से लोग नाराज और दुखी हैं… यही सबसे बड़ा कारण है कि अखिलेश यादव ने इस चुनाव में अपनी रणनीति बदल दी और वो ठाकुरों के बजाय ब्राह्मण वोटों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, क्योंकि यूपी में ब्राह्मणों का वोट ठाकुर से कहीं ज्यादा है… इसीलिए अखिलेश उन्हें साधने के लिए तमाम जतन कर रहे हैं और योगी सरकार को ठाकुर परस्त बताने में जुटे हैं…

 

BJP की राह पर चली सपा!

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर बीजेपी की रणनीति पर सपा कैसे काम कर सकती है…?
दरअसल फिलहाल के की चुनावी रैलियों को बयान को ध्यान से देखें तो सपा उसी रणनीति पर काम कर रही है जैसे पिछले चुनाव में बीजेपी ने अखिलेश को यादव परस्त बताकर सपा के खिलाफ गैर-यादव ओबीसी जातियों को जोड़ा था… और इस बार अखिलेश यादव गैर-ठाकुर सवर्ण जातियों को जोड़ने पर जोर दे रहें हैं… ये किसी से छिपा नहीं है कि ब्राह्मण और ठाकुर दोनों ही बीजेपी का हार्डकोर वोटर माना जाता है, लेकिन पांच साल में कई कारणों से ब्राह्मण की नाराजगी बढ़ी है, जिसे कैश करने के लिए तमाम पार्टियां कवायद में जुटी है… हालांकि उधर ब्राह्मण समाज के सामने भी चुनौती है कि कैसे वो खुद को किंगमेकर साबित करने वाली छवि को बनाए रखे… और एक बात आपको यहां और बता दें कि इसके लिए ब्राह्मण समाज बी आखिर समय तक इंतजार करेगा, लेकिन अगर ऐसे ही यूपी का चुनाव ब्राह्मण बनाम ठाकुर के इर्द-गिर्द सिमटता है तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है और सपा को फायदा…

यूपी में रहा ब्राह्मण-ठाकुर का बोलबाला

दरअसल यूपी में पिछड़े वर्गों और दलित समाज की राजनीति करने वाली सपा और बसपा से ठाकुर और ब्राह्मण जीतकर आते रहे हैं… उदाहरण के तौर परे देखें तो जब सपा यूपी में चुनाव जीतती है तो यादव-मुस्लिम के बाद ठाकुर राज्य की विधानसभा में सबसे बड़े समूह के रूप में उभर कर आते हैं… वहीं, बसपा की जीत में दलित-ओबीसी के साथ ब्राह्मण का प्रतिनिधित्व अच्छा खासा रहा है…इतिहास गवाह है कि यूपी में इन दोनों जातियों की जनसंख्या का 16 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं… लेकिन हर चुनाव में वे 25 प्रतिशत से अधिक विधानसभा सीटों पर कब्जा कर लते हैं …

मुलायम के दौरे में ठाकुर रहे अहम 

बात अगर मुलायम के दौरे की करे तो मुलायम सिंह यादव के दौर में भी सपा के सियासी एजेंडे में ठाकुर अहम हुआ करते थे…और बात भी साफ है कि अखिलेश यादव ये चुनाव पूरी तरह से बीजेपी के ही पिछले फॉर्मूले पर लड़ रहे हैं… वो चाहे फिर बीजेपी के तर्ज पर जातीय आधार वाले छोटे दलों के साथ गठबंधन करने की रणनीति हो या फिर गैर ठाकुर सवर्ण जातियों को साधने का प्लान… और तो और अखिलेश के चुनावी मंच और रथ यात्रा पर भी किसी ठाकुर नेता को अभी तक जगह नहीं दी गई है तो साफ संकेत हैं कि ठाकुर उनके एजेंडे से इस बाहर हैं… अखिलेश यादव इस सियासी नब्ज को पूरी समझ गए हैं कि ठाकुर वोटर किसी भी कीमत पर योगी को छोड़कर उनके साथ नहीं आएगा… उन्होंने ठाकुरों की जगह ब्राह्मणों को तरजीह देने के साथ ही दूसरे सवर्ण वोटर को भी साधने की रणनीति बनाई हैं…

 चुनाव को हिंदुत्व के इर्द-गिर्द रखेगी BJP!

हालांकि कुछ लोगों को ये भी मानना है कि BJP ने हिंदू की राजनीति कर जीत हासिल की है… और इस चुनाव में भी वो हिंदुत्व और कानून व्यवस्था को अपना राजनीतिक एजेंडा बना कर रहे हैं… ऐसे में विपक्ष भले ही उन्हें ठाकुर परस्ती के कठघरे में खड़ा कर रहा हो, लेकिन BJP इस चुनाव को हिंदुत्व के इर्द-गिर्द ही रखने की कोशिश कर रही है… हालांकि ये तो जनता को ही तय करना है कि इस बार जनता किसे सत्ता सौंपती है और किसे सत्ता से बहार रखती है… इसके लिए हमे और आपको थोड़ा इंतजार करना होगा…

 


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